सुरेखा यादव – भारत एवं एशिया कि प्रथम महिला रेल चालक
सुरेखा यादव, भारत और एशिया कि प्रथम महिला रेल चालक है | सुरेखा यादव एक सरल, शांतचित एवं हिम्मती महिला है | उनका जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक किसान परिवार में हुआ था | उसने ट्रेन का इंजन चलाने वाली देश की ही नहीं बल्कि एशिया महादीप की प्रथम महिला ड्राइवर बन कर देश की महिलाओं का सर गर्व से उंचा उठाया है | सुरेखा पढाई में शुरू से ही अच्छी थी | उसे तकनीकी विषयों में अधिक रूचि थी | उन्होंने 1986 कराड़ के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज से विद्युत अभियांत्रिकी में डिप्लोमा प्राप्त किया | अपने बैच में वह एक मात्र लड़की थी | वह 1990 में टे्रनीज सहायक इलेक्ट्रिक ड्राइवर पद पर मध्य रेलवे में नियुक्त हुई थीं। इंजन की जानकारी, मालगाड़ी और पैसेंजर गाड़ी चलाना आदि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी उन्हें प्रशिक्षण के द्वारा दी गई | श्रीमती सुरेखा यादव प्रथम ईएमयू (मुम्बई उपनगरीय रेल सेवा) का ड्राइवर भी बन गई हैं, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस में डोंबिवली स्टेशन तथा उपनगरीय रेलवे में 16 अप्रैल, 2000 को प्रथम बार उपनगरीय ईएमयू रेलगाड़ी चलाई थी। श्रीमती सुरेखा यादव भारत एवं एशिया की प्रथम महिला ड्राइवर हैं। वर्ष 1996 में सहायक ड्राइवर से पदोन्नत होकर मालगाड़ी ड्राइवर बनीं थीं, वे भारत की प्रथम मोटरवूमैन हैं। मुख्य ड्राईवर बनना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, परन्तु उसने इस चुनौती को स्वीकार किया एवं उसमे सफल भी हुई |
सुरेखा एक निडर महिला है | सुनसान घाटों में तकनीकी खराबी आ जाने से रेल रुक जाये तो वह भयभीत नहीं होती | गाड़ी विलम्ब से चलने पर लोग बेकाबू हो जाएँ तो भी वह नहीं घबड़ाती | सुरेखा के पति मुंबई पुलिस में कार्यरत है | सुरेखा मुंबई शहर को महिलाओं कि सुरक्षा की दृष्टि से सबसे सुरक्षित शहर मानती है |
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