राजस्थान
राजस्थान में प्राचीन काल से ही यादवों के बसे होने के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं | इस प्रदेश के भरतपुर, धोलपुर, करौली एवं जैसलमेर में यादव के शासन थे | भारत के 16 महाजनपदों में से एक मत्स्य जनपद (यदुवंशी) का यहाँ शासन था |
यहाँ यादव आबादी के सघनता अहीरवाल क्षेत्र में ही अधिक है, जिसके अंतर्गत अलवर, भरतपुर और बहरोर जिले आते हैं| इसके अतिरिक्त जयपुर, सवाई माधोपुर, करौली, टोंक, झालावाड़ एवं कोटा में भी यादवों की अच्छी संख्या है | यहाँ के यादव शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में अभी भी पिछड़े हुए हैं | अखिल राजस्थान यादव महासभा यहाँ के यादवों में शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक उत्थान के लिए निरन्तर कार्य कर रहा है | वर्तमान में श्री कर्ण सिंह यादव (पूर्व सांसद- अलवर) अखिल राजस्थान यादव महासभा के अध्यक्ष हैं | राजस्थान में यादवों की आबादी अन्य राज्यों की तुलना में कम है | इसके पीछे प्रमुख वजह अनेक राजघरानों का कालांतर में राजपूत एवं जाट जाति में विलीन हो जाना है | भरतपुर के शासक सिनसिनवार यादवों के वंशज कालांतर में जाट जाति में सम्मिलित हो गए | प्रकाश चन्द्र चंदावत ने भरतपुर के शासक सिनसिनवार को यदुवंशी बताया है तथा उन्हें श्री कृष्ण का वंशज बोला | इतिहासकार यू एन शर्मा ने श्री कृष्ण के 64 वीं पीढ़ी के राजा सिन्धुपाल से लेकर भरतपुर के शासक महाराजा ब्रिजेन्द्र सिंह (1929 – 1948) के वंशानुक्रम का वर्णन किया है, जिसमें उन्हें यदुवंशी जाट बताया है | कवि सुदन, कवि सोमनाथ, कवि उदयराम ने भी अपनी कविताओं में उनकी उत्पति का वर्णन इसप्रकार किया है -
तीन जाति जादव की, अंधक, विस्नी, भोज ।
तीन भांति तेई भये, तै फिर तिनही षोज ।।
पूर्व जनम ते जादव विस्नी ।
तेई प्रकटे आइ सिनसिनी ।।
जैसलमेर के भाटी यादवों के वंशज कालांतर में भाटी राजपूत बन गए |
इतिहास
मत्स्य महाजनपद :
इसमें राजस्थान के अलवर, भरतपुर तथा जयपुर ज़िले के क्षेत्र शामिल थे। महाभारत काल का एक प्रसिद्ध जनपद जिसकी स्थिति अलवर-जयपुर के परिवर्ती प्रदेश में मानी गई है। इस देश में विराट का राज था तथा वहाँ की राजधानी उपप्लव नामक नगर में थी। विराट नगर मत्स्य देश का दूसरा प्रमुख नगर था। पाली साहित्य के अनुसार मत्स्यों की उत्पति शूरसेन वंश से हुआ था | मत्स्य की एक शाखा बाद में विशाखापत्तनम चली गयी | राजा सुजाता ने चेदि एवं मत्स्य दोनों जनपद पर राज किया था , जो यह साबित करते हैं की दोनों एक ही वंश के थे |
जैसलमेर :-
जैसलमेर का इतिहास अत्यंत प्राचीन रहा है। यह शहर प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता का क्षेत्र रहा है। वर्तमान जैसलमेर ज़िले का भू-भाग प्राचीन काल में ’माडधरा’ अथवा ’वल्लभमण्डल’ के नाम से प्रसिद्ध था। ऐसा माना जाता हैं कि महाभारत युद्ध के पश्चात कालान्तर में यादवों का मथुरा से काफ़ी संख्या में बहिर्गमन हुआ। जैसलमेर के भूतपूर्व शासकों के पूर्वज जो अपने को भगवान कृष्ण के वंशज मानते हैं, संभवता छठी शताब्दी में जैसलमेर के भूभाग पर आ बसे थे। ज़िले में यादवों के वंशज भाटी राजपूतों की प्रथम राजधानी तनोट, दूसरी लौद्रवा तथा तीसरी जैसलमेर में रही। सन् 1156 में भाटी वंश के रावल जैसल ने जैसलमेर राज्य की स्थापना की। जैसलमेर पूर्व में वल्ल मण्डल के नाम से जाना जाता था और इसकी राजधानी लोद्रवा थी तथा वहाँ पवार राजा राज्य करते थे। तब इस नगर का नाम भावनगर था। सदियों से अपनी परम्परा, कला और संस्कृति को संजोता आ रहा जैसलमेर आज देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गया है। हर वर्ष लाखों पर्यटक यहाँ की स्थापत्य शैली, पीले पत्थरों पर उकेरी गई बारीक शिल्प तथा हस्तशिल्प कला को देखने आते हैं। कालांतर में भाटी परिवार के लोग राजपूत जाति में सम्मिलित हो गए |
करौली रियासत
करौली शहर की स्थापना 1348 ई० में यदुवंशी राजपूत राजा, अर्जुन पाल द्वारा की गई थी | इस पवित्र शहर को पहले वहां की स्थानीय देवी कल्याणी के नाम पर कल्याणपुरी के नाम से जाना जाता था | किद्वंतियों के अनुसार, करौली रियासत की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के 88वीं पीढ़ी के राजा, बिजल पाल जादों द्वारा 995 ई० में की गई थी | इस रियासत को ब्रिटिश राज में 17 बंदूकों की सलामी की पदवी मिली हुई थी | करौली का किला 1938 ई० तक राजपरिवार का सरकारी निवास था | करौली राज परिवार के सदस्य अपने को श्री कृष्ण के वंशज मानते है और वे यदुवंशी राजपूत जाति के अंतर्गत आते हैं | करौली के किले उनके आराध्य देव श्री मदन मोहन जी (श्री कृष्ण) की मूर्ति बनी हुई है जिसकी पूजा राजपरिवार के सदस्य एवं सम्पूर्ण राजस्थान तथा भारत भर के लोग करते हैं | चैत्र महीने में इस किले में विशाल मेला लगता है |
वर्तमान –
वर्तमान में राजस्थान के यादव प्रदेश एवं देश की सेवा में अपना भरपूर योगदान दे रहे है और अनेक पदों को सुशोभित कर रहे हैं | अलवर जिला यादव बहुल जिला माना जाता है | अलवर लोकसभा का प्रतिनिधित्व अनेक बार यादव नेताओं ने किया है | 2013 राजस्थान विधानसभा चुनाव में 5 यादव नेता विधानसभा चुनाव जितने में सफल रहे | जिनमें से तीन विधानसभा – किशनगढ़ बास, बेहरोर एवं तिजारा अलवर जिला में, एक कोतपुली विधानसभा जयपुर जिला में एवं एक हिन्दौन विधानसभा करौली जिला में है | समाज एवं राष्ट्र के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रमुख यदुवंशियों के नाम इस प्रकार है –
- डॉ. कर्ण सिंह यादव – पूर्व सांसद अलवर एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री, कांग्रेस नेता, अखिल राजस्थान यादव महासभा के वर्तमान अध्यक्ष
- एल. एन यादव – सेवानिवृत आई ए एस अधिकारी एवं अखिल राजस्थान यादव महासभा के वर्तमान महासचिव
- भूपेंद्र यादव – राज्यसभा सदस्य – भाजपा, राजस्थान, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, इनका जन्म 1969 में राजस्थान के अजमेर जिला में हुआ था | यह 2012 से भाजपा से राजस्थान के राज्यसभा सदस्य हैं|
- मेजर ओ पी यादव – पूर्व विधायक - मन्दवार, कांग्रेस
- जसवंत सिंह यादव – विधायक - बहरोर, भाजपा
- रामहेत सिंह यादव – विधायक- किशनगढ़ बांस, भाजपा
- राजेंद्र यादव- विधायक – कोतपुली- कांग्रेस
- मेमन सिंह यादव – तिजारा, बीजेपी
- राजकुमारी यादव – हिन्दौन, बीजेपी
- हेमंत यादव – पूर्व विधायक
- रामजी लाल यादव – पूर्व सांसद – अलवर
- प्रताप सिंह – सेवानिवृत न्यायाधीश
- फूल सिंह यादव – आई पी एस अधिकारी
- गनपत राम यादव – आई ए एस अधिकारी
- जे पी यादव – सहायक प्रोफेसर
- महेंद्र सिंह यादव - सेवानिवृत आई ए एस अधिकारी
- स्व० नंद लाल यादव – सेवानिवृत कर्नल
- भंवर लाल यादव – अध्यक्ष – हाड़ोती अहीर सभा, कोटा
- उषा यादव – चेयरमैन – नगरपालिका झालावाड़
- श्री वीर विक्रम यादव - आई ए एस अधिकारी
- भुवनेश यादव - आई ए एस अधिकारी
- राजेश यादव - आई ए एस अधिकारी
- ओमप्रकाश यादव - आई ए एस अधिकारी
- राजकुमार यादव - आई ए एस अधिकारी
- महंत चाँद नाथ योगी, सांसद अलवर, राजस्थान, बीजेपी
Ye. Bhati jadeha jadahv sav sale yaduvanshi gddar hai ye yadav kul ko cvhod kr rajput m vilin ho gye ye koi shrree krisn k vnsaj ni hai sb jhut hai ye mangadt khania bnate hai
जवाब देंहटाएंBete agar hum joothe h to tum ahir tatti ke pass apne yaduvanshi hone ka koi praman nahin tum ahir ho ahir tatti
हटाएंJo Gaye bhains charate the
Or rahi baat hum yaduvanshi Rajputon ki to bete pata kar le ki bhagwan shree Krishna ke asli vansaj hum yaduvanshi Rajput bhati jadaun or Gujrat ke jadeja choodasma h
Samjha or hum bhati Rajputon ke pass to hamare aardhya dev shree Krishna ka 1000 ro saal purana chatra or unki bahiya pothiyaan
Unse hamare sampirna kul or hmare shashan ki poori jaankari h
Tum ahiron ke pass koi praman nahin h bas idhar udhar ghoomte Gaye charate the or raja maharaj ki tatti saaf karte the or ye h asli chatriya
Kaha the itne saal se
Kaha Gand mara rahe the kaha maa chuda rahe the be bhoshdike
Agar itne hi bade chatriya or asli yaduvanshi chatriya the to Kya maa chudate ke liye Gaye bhains charate the be bhoshdike
Chatriya ka kam shashan karna hota h gaand maraje doosro. Ki Gaye bhains charane ka nahin
Samja be ahir tatti
Madar jat sudhar jao yadav ka itihas bahut purana h beta apne bap se puchh
हटाएंOr haan hum fake ahir nahin h samjhe be tatti bhoshdike 😂🤣 🤣
जवाब देंहटाएंOr Rajasthan me yadav sirf alwar me hi h or wahaan ki riyasaton ka raja bhi humare kishwaha Rajput the samja be chootiye
Chal nikal ahir lawde
Abb mulle ki aulaas yaduvanshi baney chale, mulle ke choot mugalput
हटाएंAbe bhosodi mulle ki choot chaat Chateney wala jodha ki paidaish tu kavi yadav nahi ho sakta randiput,
हटाएंOye mc jyada mt bol beta yadavo ke baare me janta kya h tere bap videsh me bhi pm bne hue h saale sur ki aulad
हटाएंBeta tu yadavo ki aulad m bol to rha hu tu papa bol mugal ki aulad
हटाएंOr haan hum fake ahir nahin h samjhe be tatti bhoshdike 😂🤣 🤣
जवाब देंहटाएंOr Rajasthan me yadav sirf alwar me hi h or wahaan ki riyasaton ka raja bhi humare kishwaha Rajput the samja be chootiye
Chal nikal ahir lawde
भाटी,चूड़ासम,जादोन, जडेजा, सैनी ये सब तुर्की बंजारे हैंl यादवों से इनका कोई सम्बंध नहीं हैं.
जवाब देंहटाएंRight
हटाएंAre tm dono ho to yadav je n to faltu m ldai mt kro
जवाब देंहटाएंJadeja .jadoun. bhati.choodsama
जवाब देंहटाएं.inka yaduvansh se dur dur tk nata nhi h..or rhi yaduvanshi ki baat google pr yaduvanshi search kro..or dekhna..yaduvanshi ahir hai.
Rajpoot ka koi purani riyasat nhi h..13vi satabdi k bad tum log aaye ho...yadav caste kafi prachin or balshali rahi. Isiliye tum log yaduvansh m jbrdsti na ghuso..itihas choro
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