आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना
महाभारत में सम्पूर्ण भारत में यादवों की विशाल
आबादी एवं प्राचीन भारत में अनेक यादव साम्राज्यों का वर्णन है | महाभारत काल में
आन्ध्र प्रदेश में यादवों की चार मुख्य शाखाएं – अन्धक, वृष्णि, कुकूर और भोज
निवास करती थी | आधुनिक आंध्रप्रदेश में अन्धक एवं कुकूर यादवों के विशाल आबादी है
| इस क्षेत्र में अन्धक यादवों की विशाल आबादी के कारण ही, इस राज्य का नाम
आंध्रप्रदेश पड़ा | 2 जून 2014 को आंध्रप्रदेश के 23 जिलों में से 10 जिलों को अलग कर तेलंगाना को देश का 29वां राज्य बनाया गया | सीमान्ध्र प्रदेश में यादव सम्पूर्ण राज्य में फैले हुए हैं, परन्तु इस राज्य के विशाखापतनम, प्रकाशम एवं कर्नूल जिले में तथा कृष्णा जिले के पेनामलुरु, कैकलुरु तथा नुजविद मंडल में यादवों का आबादी का घनत्व अधिक है | जबकि तेलंगाना प्रदेश के हैदराबाद एवं सिकंदराबाद से सटे क्षेत्रों में यादवों का जनसंख्या घनत्व अधिक है | इन दोनों प्रदेशों में यादवों की कुल आबादी लगभग 20% है | हैदराबाद में मनाया जाने वाला "सदर महोत्सव" यहाँ के यादवों का प्रमुख धार्मिक आयोजन है | इसमें लोग अपनी -अपनी भैसों को सजाकर उसकी प्रदर्शनी करते है| नवयुवक अपनी कला एवं कौशल का भी प्रदर्शन करते हैं |
यादव की उपजाति
यहाँ यादवों को विभिन्न
नामों से जाना जाता है | भेड़ पालने वाले यदुवंशियों को – कुरुबा, कुरुम्बार,
कोरबा, धांगर तथा गौ पालने वाले यदुवंशियों को यादव, गोल्ला, येरोगोल्ला, कोणार, इद्यार,
राजू, रेड्डी (रेड्डी जाति नहीं) आदि के
नाम से जाना जाता है |
इतिहास
आन्ध्र प्रदेश में
लंबे समय तक विजयनगर के यादव राजाओं का शासन रहा | इनके शासन काल में इस प्रदेश की
काफी उन्नति हुई | विजयनगर साम्राज्य मध्यकालीन भारत का एक शक्तिशाली हिन्दू
साम्राज्य था | इस साम्राज्य की स्थापना 1336 ई० में दो वीर यादव भाइयों – हरिहर
राय (हक्का) एवं बुक्का राय द्वारा महान संत माधव विद्यारण्य एवं उसके भाई सायन की
प्रेरणा से तुंगभद्रा नदी के किनारे अनागुन्दी किला के पास की गई थी | महाराजा
कृष्णदेव राय इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था |
आन्ध्र प्रदेश में
काकतीय एवं तेलगु चोल राजाओं के सामंत के रूप में यादव वंश के तीन राजवंशों ने
छोटे राज्यों पर शासन किया जिसकी राजधानी क्रमशः अद्दानकी, पनुगल तथा अलावुलापदु
थी | ये देवगिरि के यादव वंश के समकालीन थे | पनुगल के यादव राजाओं को छोड़कर तेलगु
यादव राजाओं का मराठा देश के यादव राजाओं के साथ कोई रक्त सम्बन्ध नहीं था
अद्दानकी के यादव – 1150 ई० – 1270 ई०
अद्दानकी के
यादव चक्रनारायण के नाम से भी जाने जाते थे
क्योंकि अपने नाम के बाद वे इस उपाधि को धारण करते थे | उन्होंने 1150 ई० –
1270 ई० तक गुंटूर जिले के कुछ भाग पर शासन किया | उनकी राजधानी अद्दानकी थी, जो
वर्तमान ओंगोल तालुक में अवस्थित है | बाद में यह रेड्डी राजाओं का राजधानी बना |
काकतीय राजाओं के अधीन ये शक्तिशाली सामंत थे | इस वंश में छः राजाओं ने शासन किया
जो महान योद्धा भी थे –
1. सारंगधर 1 –
1150 ई० – 1208 ई०
2. माधवदेव – 1208
– 1247 ई०
3. सिंगलादेव –
1247 – 1253 ई०
4. सारंगधर 2 –
1253 – 1267 ई०
5. सिंगादेव - 1267 – 1272 ई ०
6. माधव - 1272 ई०
कहा
जाता है कि गोलकुंडा के किले का निर्माण एक गड़ेरिये ने अपनी विलक्षण दैवीय शक्ति के
द्वारा किया था | गोलकुंडा, गोल्ला (ग्वाल – यादव) और कुंडा (किला ) शब्दों के मेल
से बना है, जिसका तेलगु भाषा में शाब्दिक अर्थ यादव का किला होता है | इस किले में
एक तिजोरी था, जिसमे विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर का हीरा रखा हुआ था |
आंध्रप्रदेश
राज्य संग्रहालय में संग्रहित यादव शासकों के बहुमूल्य स्वर्ण सिक्के प्राचीन भारत
में महान यादव राजाओं के गौरवमय इतिहास के पक्के साक्ष्य एवं सबूत हैं | ये सिक्के
चार मुख्य यादव शासक – सिंघन यादव, कृष्णा
अथवा कान्हा यादव, माधव यादव एवं रामदेव यादव के शासन काल के हैं | 1965 में
आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा ‘डॉ आर. सुब्रह्मण्यम’ द्वारा लिखी गई “यादवों के
सिक्के” नामक पुस्तक प्रकाशित की गई थी, जिसमे इन सिक्कों के संकलन की सुन्दर छवि
प्रकाशित की गई थी |
आन्ध्र
प्रदेश के यादवों का इतिहास विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर का वर्णन किये
बिना अधूरा है | तिरुपति बालाजी मंदिर का
निर्माण सात पहाड़ियों को काटकर चोल राजाओं द्वारा किया गया था तथा इसका
पुनर्निर्माण विजयनगर नगर के शासक वीर नरसिंह देव यादव राय एवं राजा कृष्णदेव राय
द्वारा किया गया था | विजयनगर के राजाओं ने बालाजी मंदिर के शिखर (विमान) को
स्वर्ण कलश से सजाया था | विजयनगर के यादव राजाओं ने मंदिर में नियमित पूजा , भोग,
मंदिर के चारों ओर प्रकाश तथा तीर्थ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त प्रसाद
की व्यवस्था कराई थी | तिरुपति बालाजी (भगवान वेंकटेश) के प्रति यादव राजाओं की
निःस्वार्थ सेवा के कारण मंदिर में प्रथम पूजा का अधिकार यादव जाति को दिया गया है
| इस प्रथा का आज भी पालन किया जाता है | आज भी प्रत्येक दिन प्रातः काल में मंदिर
का मुख्य द्वार यादव वंश में उत्पन्न व्यक्ति द्वारा खोला जाता है तथा वही भगवान
बालाजी की प्रथम पूजा करता है |
राजा कटमराजू :-
कटमराजू, कानिगिरी का एक महान यादव राजा था | जिसने तेरहवीं शताब्दी में नेल्लोर के राजा नलसिद्धि के साथ पलेरू नदी के किनारे एक भीषण लड़ाई लड़ा था | जनश्रुतियों के अनुसार, कटामराजू के राज्य में भीषण सुखा पड़ने के कारण उन्हें अपनी प्रजा तथा उनकी मवेशियों के रक्षा के लिए पडोसी राज्य नेल्लोर के हरे भरे क्षेत्र में शरण लेना पड़ा | राजा कटमराजू नेल्लोर के राजा नलसिद्धि के साथ संधि कर वहाँ शांतिपूर्वक रहने लगा | किन्तु भ्रमवश यह संधि टूट गई और इसका परिणाम दोनों राजाओं के मध्य भयंकर युद्ध के रूप में आया | इस युद्ध में दोनों पक्ष के अनेक वीर योद्धा शहीद हुए थे | इस युद्ध में राजा कटमराजू ने असाधारण वीरता का परिचय दिया | इसी के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष पलेरू नदी के किनारे एक वार्षिक समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमे यादव, कुरुबा एवं कोमवारू जाति के हजारों लोग इकटठा होते हैं तथा अपने महान राजा कटमराजू के वीरता को नाटक एवं अन्य माध्यमों के जरिये प्रदर्शित करते हैं तथा शहीद हुए वीरों को अपना श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं |
आंध्रप्रदेश में यादवों का धार्मिक
सत्ता –
राज्य
एवं जागीर के अतिरिक्त यादवों को उनकी धार्मिक शक्ति के कारण धार्मिक पीठ (सीट) भी
प्रदान की गई थी| आँध्रप्रदेश के वारंगल के यादवों को चौदह पीठ का सनद प्रदान किया
गया था| शक संवत 1425 के सनद के अनुसार वारंगल के राजा श्री रूद्र प्रताप ने श्री
कोंदिया गुरु को इन चौदह पीठों का प्रमुख बनाया था|
बाद
में जब 1560 ई० कुतुबशाही सुल्तान अब्दुल्ला ने भाग्यनगर की स्थापना किये, तब भी
उन्होंने यादवों के धार्मिक महत्ता एवं प्रभुता को स्वीकार करते हुए मनुगल का नाम
परिवर्तित कर गोलकुंडा रखा| हिजरी संवत 1701 के चार्टर के अनुसार कुतुबशाही वंश के
सुल्तान अब्दुल्ला ने माना की गोलकुंडा किला का निर्माण कोंडिया गुरु द्वारा उनकी
अद्भुत शक्ति एवं रहस्यमय ज्ञान से किया गया है| श्री कोंडिया गुरु ने अपने रहस्मय
ज्ञान से उन्हें छिपा हुआ खजाना भी दिलाया | इसके बदले में सुल्तान ने उन्हें 14
पीठ का प्रधान नियुक्त किया| इन चौदह पीठों में 12 पीठ गोल्ला को तथा 02 पीठ
कुरुबा गोल्ला को प्रदान किया गया|
वर्तमान –
वर्तमान समय
में आन्ध्रप्रदेश एवं तेलंगाना के यादव सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक एवं राजनैतिक रूप से काफी जागरूक एवं विकास की ओर अग्रसर हैं | समाज के प्रत्येक क्षेत्र में उनका
योगदान उल्लेखनीय है |परन्तु इसाई मिशनरीज के प्रलोभन में आकर बहुत से यादव धर्म
परिवर्तन कर रहे हैं, जो चिंता का बिषय है | यादवों को अपने गौरवमय अतीत एवं
विरासत से परिचित होने की जरुरत है |
बिभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान
देने वाले यादव बिभूतियों के नाम इस प्रकार हैं –
अ. राजनीति
1. बंडारू
दतात्रेय – (जन्म – 26 फरवरी 1947) वह भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं | उन्होंने 1991,
1998 एवं 1999 में सिकंदराबाद से लोकसभा चुनाव जीता तथा अटल बिहारी बाजपेयी सरकार
में केंद्रीय मंत्री बने | 2014 में पुनः सिकंदराबाद से भाजपा के टिकट पर सांसद बने |
3. कोलुसु पार्थ
सारथी – यह पूर्व सांसद के. पी. राडैय्या के पुत्र हैं | ये कृष्णा
जिला के पेनामलुरु विधानसभा से विधायक तथा किरण कुमार रेड्डी सरकार में माध्यमिक
शिक्षा मंत्री थे | 2014 में विधानसभा चुनाव हार गए |
4. नीलकंतापुरम
रघुवीर रेड्डी – (जन्म – 12 फरवरी 1957) वह अनन्तपुर जिला के दिग्गज कांग्रेसी
नेता हैं | उन्होंने मदकासीरा विधानसभा से तीन बार चुनाव जीता | वह कल्यानदुर्ग विधानसभा से विधायक तथा किरण कुमार रेड्डी सरकार में राजस्व मंत्री
(कैबिनेट मंत्री) थे | इससे पूर्व वाई. एस. आर. रेड्डी सरकार तथा कोनेझी रोसैय्या
सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं | 2014 में विधानसभा चुनाव हार गए |
5. डॉ ए चक्रपाणि
(यादव) – वे वर्तमान में आन्ध्र प्रदेश विधान परिषद् के सभापति हैं | वे पूर्व में
आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में वकील थे | वह 1976 से 1985 तक तथा 2007 से आज तक
आन्ध्र प्रदेश विधान परिषद् के सदस्य हैं
|
6. के. वी.
नागेश्वर राव – पूर्व विधायक, तनुकू, कांग्रेस
7. जी. जयपाल यादव
– पूर्व विधायक, कलावाकुर्थी, तेदेपा
8. एम्. विक्षपथी
यादव – पूर्व विधायक, श्रीरंगमपल्ली, कांग्रेस
9. वी. मस्तान राव
यादव – पूर्व विधायक, कावली
10. बी. के. पार्थ सारथी – विधायक, पेनुकोंदा,
तेदेपा
11. जी. टिप्पे
स्वामी – एमएलसी, अन्नतपुर
12. कोम्पल्ली यादव
रेड्डी- एमएलसी, रंगारेड्डी जिला
13. आर. गोपीनाथ –
एमएलसी, चित्तूर जिला
14. जी. नरसिम्हा
राजू – एमएलसी
15. जगना
कृष्णमूर्ति – पूर्व विधायक, कांग्रेस
16. पलेती रामा राव
– पूर्व विधायक
17. संगम रेड्डी
सत्यनारायण – पूर्व विधायक
18. यानामल
रामकृष्णुदु – एमएलसी, तेदेपा, 1995 से 1999 तक आन्ध्र प्रदेश विधानसभा से अध्यक्ष रहे, वर्तमान में चन्द्र बाबु नायडू सरकार में वित्त मंत्री हैं |
19. तालासनी श्री
निवास यादव – विधायक, सनाथनगर, सिकंदराबाद, तेदेपा, तेलंगाना, दिसम्बर
2014 में वह तेदेपा से इस्तीफा देकर टीआरएस में शामिल हो गए | उन्हें पर्यटन मंत्री बनाया गया है |
20. वाई अन्जैहा यादव - शादनगर, (जिला-महबूबनगर), टीआरएस, तेलंगाना
21. जी शंकर यादव - विधायक, थम्बल्लापले (जिला - चित्तूर), तेदेपा, आन्ध्रप्रदेश
21. पल्ला श्री निवास राव - विधायक, गजुवाका (जिला- विशाखापतनम), तेदेपा, आन्ध्रप्रदेश
2014 में वह तेदेपा से इस्तीफा देकर टीआरएस में शामिल हो गए | उन्हें पर्यटन मंत्री बनाया गया है |
20. वाई अन्जैहा यादव - शादनगर, (जिला-महबूबनगर), टीआरएस, तेलंगाना
21. जी शंकर यादव - विधायक, थम्बल्लापले (जिला - चित्तूर), तेदेपा, आन्ध्रप्रदेश
21. पल्ला श्री निवास राव - विधायक, गजुवाका (जिला- विशाखापतनम), तेदेपा, आन्ध्रप्रदेश
22. पी अनिल कुमार यादव - विधायक, नेल्लोर (नगर), वाई एस आर, आन्ध्रप्रदेश
ब. खेल
1. शिवलाल यादव – पूर्व क्रिकेटर
2. अर्जुन
यादव –शिव लाल यादव के पुत्र एवं क्रिकेटर
स. अभिनय
1. सूर्य
शिवकुमार
2. अर्जुन
3. निखिल
सिद्धार्थ
4. कार्तिक
शिवकुमार
5. पारुल यादव
द. प्रशासन
1. वी.
एन. विष्णु – आई. ए. एस. अधिकारी
2.
कवेटी विजयानंद – आई. ए. एस. अधिकारी
3. बी.
उदय लक्ष्मी – आई. ए. एस. अधिकारी
4.
कृष्णैया - आई. ए. एस. अधिकारी

Jay Yadav
जवाब देंहटाएंJai yadav jai yadav jai andhera pradesh jai telangana
जवाब देंहटाएंयादव जय यादव
जवाब देंहटाएंJay yadav jay madhav
जवाब देंहटाएंजय यादव , जाए माधव ।
जवाब देंहटाएं