सोमवार, 11 अगस्त 2014

Yadavas in Gujrat- गुजरात में यादव



गुजरात

गुजरात में यादव समुदाय तीन जाति समूह में विभक्त है – (1) अहीर, (2) यदुवंशी राजपूत एवं (3) धनगर | इतिहास बोध की कमी एवं अंग्रेजों तथा ब्राहमणों द्वारा पोषित “फूट डालो और राज करो” नीति के दुष्परिणाम स्वरुप इन सजातीय समूहों में परस्पर एकता और अपनत्व का घोर अभाव है | गुजरात में यादव समुदाय की आबादी जामनगर, जूनागढ़, कच्छ, राजकोट एवं अमरेली जिलों में अधिक है |
महाभारत, विष्णु पुराण, श्री मदभागवत पुराण आदि के अनुसार यदुवंश शिरोमणि भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा पर मगध नरेश जरासंघ के बार-बार आक्रमण से तंग आकर अपनी राजधानी मथुरा से द्वारिका में स्थानांतरित कर दिया था | द्वारिका सौराष्ट्र के समुद्री तट पर अवस्थित था | इसीलिए श्री कृष्ण को ‘द्वारिकाधीश’ के नाम से भी जाना जाता है | पौराणिक ग्रंथों में भी इस क्षेत्र में अहीरों (अभीर, गोप, यादव आदि) के बसे होने का वर्णन मिलता है |
सौराष्ट्र के प्रभास क्षेत्र में अवस्थित सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है | इस मंदिर को अविनाशी भी कहा जाता है, क्योंकि अनेक बार तोड़े जाने पर भी इसका पुनर्निर्माण हुआ है | सोमनाथ मंदिर का निर्माण ईसा पूर्व ही हुआ था | इसका द्वितीय बार पुनर्निर्माण गुजरात के वल्लभी के यादव राजाओं ने 649 ई० में किया था |
1.      अहीर – गुजरात में अहीर समाज तीन उप जाति में विभक्त है – यदुवंशी अहीर, नंदवंशी अहीर एवं ग्वालवंशी अहीर | भगवान श्री कृष्ण के वंशज यदुवंशी अहीर, उनके पालक पिता नन्द बाबा के वंशज ‘नंदवंशी अहीर’ और श्री कृष्ण के संग रहने एवं खेलने वाले पवित्र ग्वालों के वंशज ‘ग्वालवंशी अहीर’ के नाम से जाने जाते हैं |
इसके अतिरिक्त यादव समाज क्षेत्र के अनुसार ये निम्न उपनामों से जानी जाती है –
क.    पंचोली अहीर – सौराष्ट्र के पंचाल क्षेत्र में निवास करने वाले अहीर ‘पंचोली अहीर’ के नाम से जाने जाते हैं | ये मुख्य रूप से जूनागढ़, अमरेली एवं भावनगर जिले में निवास करते हैं |
ख.     मछौया अहीर – मछु कटिया नदी के किनारे बसने वाले अहीर ‘मछौया अहीर’ के नाम से जाने जाते हैं |
जनश्रुतियों के अनुसार वे सुमरा राजपूत के वंशज हैं तथा उनके वंशज सिंध से पलायन कर सौराष्ट्र में बस गए और अहीर लड़की से शादी कर अहीर बन गए | ये ज्यादातर राजकोट जिले में बसे हुए हैं | इनकी कुछ आबादी जूनागढ़ जिले में भी है | इन्हें यादव भी कहा जाता है |
ग.     परथारिया अहीर – श्री कृष्ण भगवान के साथ मथुरा से आकर सौराष्ट्र के परथार क्षेत्र में बसने वाले अहीर ‘परथारिया अहीर’ के नाम से जाने जाते हैं | 1500-1600 ई० के आस पास ये परथार क्षेत्र से प्रवासित होकर कच्छ में बस गए | सम्प्रति वे कच्छ जिले के 84 गांवों में बसे हुए हैं | इनमे से 34 गाँव भुज तालुक में, 24 गाँव अंजार तालुक में और 12 गाँव नकाथ्राना तालुक में है | कुछ लोग सौराष्ट्र में भी बसे हुए हैं |
घ.     सोराठिया अहीर – सोरठ क्षेत्र में बसने के कारण ये ‘सोराठिया अहीर’ कहलाने लगे| यह कच्छ जिले के अंजार तालुक एवं भुज तालुक में मुख्य रूप से बसे हुए हैं | अंजार शहर का सब्जी व्यवसाय पर इनका लगभग एकाधिकार है |
ङ.       बोरिचा – यह गुजरात में अहीरों की एक उप जाति है |
च.     भरवाड – भरवाड अपने आपको नंदवंशी अहीर कहते हैं | सौराष्ट्र के भरवाड अपने नाम के साथ अहीर उपनाम का प्रयोग करते हैं | गुजराती में भरवाड का शाब्दिक अर्थ भेड़ (भर) वाला (वड) होता है |
छ.    भुर्तिया – फुर्ती शब्द से भुर्तिया शब्द की उत्पति हुई है | इनके पूर्वज अपनी शारीरिक चपलता के लिए प्रसिद्ध थे | यह अवध से आकर गुजरात में बस गए | वे मुख्य रूप से वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ और मथुरा जिले में पाए जाते हैं |

2.      यदुवंशी राजपूत – गुजरात के जडेजा, चुडासमा और गायकवाड़ वंश के लोग यदुवंशी राजपूत कहे जाते हैं | इन्होने भिन्न-भिन्न काल में गुजरात और इसके आस-पास के क्षेत्रों पर शासन किया है |
क.     गायकवाड़- गायकवाड़, गायकवार अथवा गायकवाड एक मराठा कुल है, जिसने 18 वीं सदी के मध्य से 1947 तक पश्चिमी भारत के वड़ोदरा या बड़ौदा रियासत पर राज्य किया था| गायकवाड़ यदुवंशी श्री कृष्ण के वंशज माने जाते हैं तथा यादव जाति से आते हैं | उनके वंश का नाम गायकवाड़ – गाय और कवाड़ (दरवाजा) के मेल से बना है | बड़ौदा के गायकवाड़ राजवंश की स्थापना मराठा जनरल पिलाजी राव गायकवाड़ द्वारा 1721 ई०में मुग़ल साम्राज्य से यह शहर जीतकर किया गया था |
ख.     जडेजा - नवानगर रियासत कच्छ की खाड़ी के दक्षिण में काठियावाड़ क्षेत्र में अवस्थित था | इस रियासत पर 1540 ई० से लेकर 1948 ई० तक जडेजा वंश का शासन रहा | इस वंश के शासक अपने को यदुवंशी श्री कृष्ण के वंशज मानते थे, इसप्रकार यह वंश यदुवंशी राजपूत कुल के अंतर्गत आता है |
नवानगर रियासत की स्थापना कच्छ के जडेजा शासकों के वंशज जाम रावल ने 1540 ई० में किया था | जाम साहेब रणजीत सिंह जी 1907 से 1933 तक इस रियासत के राजा रहे | वो एक प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी थे | रणजीत सिंह जी इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय के तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट तथा ससेक्स की ओर से काउंटी क्रिकेट खेलते थे | उन्हीं के सम्मान में भारत में प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी खेला जाता है|
1948 में इस रियासत का भारत संघ में विलय कर दिया गया | भारत संघ में विलय की संधि पर हस्ताक्षर करने वाला प्रथम रियासत नवानगर ही था |
1949 में नवानगर एवं इसके पड़ोसी क्षेत्रों को मिलाकर सौराष्ट्र राज्य का निर्माण किया गया था | यह क्षेत्र वर्तमान गुजरात राज्य के जामनगर जिले में आता है | 1 मई 1960 को बम्बई प्रेसिडेंसी का विभाजन कर गुजरात राज्य का गठन किया गया | जामनगर जिला गुजरात राज्य का अंग बन गया | 
ग.     चुडासमा – यह सिंध के प्राचीन अभीर जाति के वंशज माने जाते हैं | जिन्होंने 875 ई० तक जूनागढ़ पर शासन किया | वर्तमान में ये गुजरात से प्रवासित होकर सम्पूर्ण विश्व में फ़ैल गए हैं | केन्या एवं ब्रिटेन में बसा यह समुदाय अत्यंत उन्नत एवं समृद्ध है | इतिहास में हेमचन्द्र नामक चुडासमा राजा का वर्णन मिलता है, जो अहीर एवं यादव के नाम से भी जाना जाता था | चुडासमा राजा, अहीर राणा भी कहलाते थे | जूनागढ़ का अहीर राजा रा ग्रहरिपू  ने 961 ई० में सोलंकी राजा मूलराज के साथ युद्ध किया था जो सिंध के चुडासमा वंश का राजा था |  इस वंश का पूर्वज गजपत नाम का राजा था, जो मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा बंदी बनाकर मुस्लिम बनाये जाने के भय से हिंगलाज माताजी के चूड़ियों (चुडा) के पीछे छिप गया था, इसलिए उसके वंशज चुडासमा कहलाये|
जडेजा, गायकवाड़ और चुडासमा अपने आप को यदुवंशी क्षत्रिय कहते हैं, किन्तु दुर्भाग्यवश ये अपने आप को गुजरात के अहीरों एवं यादवों के बजाय राजपूत जाति से सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से अधिक नजदीक मानते हैं |
3.      गड़ेरिया – यहाँ यदुवंशी गड़ेरिया को धनगर, पाल, बघेल आदि के नाम से जाना जाता है| इनका भी अपना अलग संगठन है, जो यदुवंशी एकता के लिए खतरनाक है | आवश्यकता है अलग-अलग गुटों में विभक्त इस यदुवंशी समाज को एक मंच पर लाने का | इसके लिए महती प्रयास की आवश्यकता है |
गुजरात अहीर डॉक्टर्स एसोसिएशन वहां के अहीर डॉक्टर्स के भलाई एवं कल्याण के लिए अच्छा कार्य कर रहा है | इसके प्रेसिडेंट – डॉ महेश बी राठोड़ तथा सचिव डॉ एम. एस. डांगर हैं|
वीर अहीर देवायत बोदर का उल्लेख किये बिना गुजरात का यादव इतिहास अधुरा है -
देवायत बोदर (सन 900 – 1025 ईo) :-
      
देवायत बोदर एक महान योद्धा था, जो अपनी वीरता, बलिदान एवं मातृभूमि के प्रति अनन्यप्रेम के लिए जगप्रसिद्ध है | उन्होंने जूनागढ़ के चुडासमा राजा रा दियास के पुत्र का लालन-पालन किया था तथा जूनागढ़ का राज्य सोलंकियों से छिनकर चुडासमा राजा रा दियास के पुत्र रा नवघन को जूनागढ़ के सिहांसन पर पुनर्वापसी करवाया था |
गुजरात में एक कहावत है "अहीर नो आसरो" जिसका मतलब है "अहीर का आश्रय या सहारा" | आड़े वक्त में जब किसी को कहीं भी ठिकाना नहीं मिलता है तब वह अहीर की शरण में जाता है | इस का सबसे बड़ा उदहारण है परम बलिदानी वीर अहीर देवायत बोदर | जूनागढ़ के राजपूत जब लड़ाई में मारे गये तो जूनागढ़ की रानी ने अपने बच्चे को अहीरों की शरण में भेज दिया जिससे कि उस की जान बच जाए | शरणागत कि रक्षा का धर्म निभाते हुए वीर देवायत बोदर ने अपने पुत्र का बलिदान दिया और अपनी तलवार के जोर पर नवघन राजपूत के प्राणों की रक्षा की |
गुजरात में एक कहावत है "अहीर नो आसरो" जिसका मतलब है "अहीर का आश्रय या सहारा" | आड़े वक्त में जब किसी को कहीं भी ठिकाना नहीं मिलता है तब वह अहीर की शरण में जाता है | इस का सबसे बड़ा उदहारण है परम बलिदानी वीर अहीर देवायत बोदर | जूनागढ़ के राजपूत जब लड़ाई में मारे गये तो जूनागढ़ की रानी ने अपने बच्चे को अहीरों की शरण में भेज दिया जिससे कि उस की जान बच जाए | शरणागत कि रक्षा का धर्म निभाते हुए वीर देवायत बोदर ने अपने पुत्र का बलिदान दिया और अपनी तलवार के जोर पर नवघन राजपूत के प्राणों की रक्षा की |
      देवायत बोदर का जन्म एक अहीर परिवार में जूनागढ़ के आडीदर बोडिदर नामक ग्राम में हुआ था | उनकी पत्नी का नाम सोनल बाई था | उनसे उनकी दो संतान थी – पुत्र उगा एवं पुत्री जाहल |
चुडासमा राजा रा दियास जूनागढ़ के राजा थे तथा ‘वामनस्थली’ उनकी राजधानी थी | जब पाटणपति राजा दुर्लभसेन सोलंकी ने छल से रा नवघन के पिता चुडासमा राजा रा दियास से जूनागढ़ का राज्य छीन लिया और राजा रा दियास की मौत हो गई  तो रा' दियास की रानियों ने जौहर किया, लेकिन सोमलदे परमार नाम की रानी सगर्भा थी, इसलिए वह किले से भाग कर "नवघण" नामक एक पुत्र  को जन्म देती है और उस पुत्र को जीवित रखने हेतु अपनी वालबाइ नामकी दासी को पुत्र "नवघण" को सोंपकर कहती है, " आडीदर बोडिदर गांव मे जाकर वहाँ अहीर देवायत बोदर को कहना कि इस बालक को बड़ा करे और जुनागढ की गद्दी पर बिठाए | रानी सोमलदे ने देवायत बोदर को धर्म भाई बनाया था | दासी छुपते-छुपाते बाल नवघण को आडीदर बोडिदर के अहीर देवायत के यहां ले आती है और सोमलदे का संदेशा देती है | अहीर देवायत बोदर ने नवघण को आहीराणी को सौंपा और कहा - भगवान मुरलीधर ने आज अपने को राजभक्ति दिखाने का अवसर दिया है और आज से अपने तीन बालक है | देवायत बोदर ने वचन दिया कि वह राजपुत्र कि रक्षा अपने प्राणों कि आहुति देकर भी करेगा | अहिराणी ने अपनी बेटी जाहल का दुध छुड़ा दिया और नवघण को स्तनपान कराया, तीनो बच्चे नवघण, देवायत का बेटा उगा और बेटी जाहल को अहिराणी सोनलाबाई मां का प्यार देने लगी | रा’ नवघन एवं ऊगा दोनों हमउम्र थे | जब वे दोनों 12 साल के हुए तब किसी ने सोलंकी राजा को खबर दे दी कि चुडासमा राजा रा दियास का पुत्र रा नवघन जिन्दा है और उसका लालन-पालन देवायत बोदर द्वारा किया जा रहा है | देवायत बोदर को सोलंकी राजा ने राजदरबार में बुलाया और उसे सूचना की सत्यता के बारे में पूछा | परिस्थिति कि गंभीरता को भांपते हुए अहीर देवायत बोदर ने सच बोलना ही उचित समझा | सोलंकी राजा ने रा’ नवघन को राजदरबार में लाने को कहा |
देवायत बोदर ने  कहा कि मैं घर पर पत्र लिख देता हूँ, अहिराणी को पत्र देते ही वे आपको नवघण सोंप देगी | देवायत ने पत्र लिखा, अहिराणी, सोलंकियों का जो शत्रु अपने घर पर इतने दिनो से पल रहा है, उसे इन आये हुए राज सैनिकों के साथ भेज देना, रा' रखकर बात करना !
सौराष्ट्र और गुजरात की भाषा एक है किंतु उनकी बोलने की शैली अलग है | पत्र के अंत मे जो लिखा था "रा' रखकर बात करना" उसका मतलब सैनिकों के साथ खुद देवायत का बेटा उगा को भेजना है, नवघण को नही भेजना है. सोलंकियों ने पत्र पढा पर उन्हे उस बात का पता नही चला !
अहिराणी ने अपने खुद के बेटे उगा को राजसी वस्त्र पहनाये, आभूषणो से सुसज्जित कर के सैनिकों के साथ भेज दिया | चुडासमा राजा रा दियास का पुत्र  कौन है इसकी पुष्टि करने के लिए सोलंकी राजा ने देवायत को आदेश दिया कि अपने हाथों से नवघण का सर धड से अलग कर दे | देवायत ने ऐसा ही किया किन्तु इसे करते वक्त अपने मुख पर एक भी दु:ख का भाव नही आने दिया | ताकि यह साबित हो सके कि वह उसका बेटा ऊगा नहीं बल्कि रा’ नवघन था | फिर भी सोलंकी राजा को संतोष नहीं हुआ | सोलंकियों  ने उस बात की पुनः पुष्टि करने हेतु अहिराणी सोनलबाई को राजदरबार में बुलाया और उसे मृतक के माथे से आँखों को निकालकर आंखो पर से चलने को कहा | यह एक बहुत ही क्रूर एवं कठिन परीक्षा था | फिर भी राजपुत्र कि रक्षा के लिए  अहिराणी ने अपने आंखो से एक भी आंसु गिराए बिना उक्त कार्य को किया और यह साबित किया कि मरने वाला नवघण ही था उसका पुत्र उगा नहीं | धन्य थी वह माँ और धन्य था वह पिता, जिसने मातृभूमि के लिए अपने पुत्र का हँसते – हँसते बलिदान कर दिया |
 वीर देवायत ने अपनी बेटी जाहल का विवाह सासतीया नाम के अहीर से किया | विवाह मे पुरे सौराष्ट्र के अहीर समाज को आमंत्रित किया गया | देवायत ने आये हुए सभी मेहमानों को राजदरबार में हुए घटना का सत्य बताया | उसने बताया कि उस दिन जो सोलंकियों के हाथो मारा गया था वो मेरा बेटा ऊगा था, असली नवघण अभी जीवित है | नवघण की मां, मेरी धर्मबहन रोज मुझे सपनो में पूछती है कि नवघण को गद्दी पर बिठाने में अभी कितना समय है ? लेकिन अहीर भाइयों आज समय आ गया है | आज जुनागढ का तख्त पलटेगा | आप सभी की सहायता से मैं अपने पुत्र की मृत्यु का प्रतिशोध लुंगा | वहां उपस्थित सभी अहीरों ने जाहल की शादी का आमंत्रण देने आये है ऐसा कहकर उपरकोट किले में  प्रवेश कर गये और योजना के अनुसार अंदर जाते ही सोलंकियों को संहार करने लगे | नवघण अपने 'झपडा' नाम के घोड़े पर बैठ कर उपरकोट की दीवारों पर से तीरदांजी कर रहे सोलंकी सैनिकों का नाश करने लगा | सोलंकियों को हार माननी पडी |

देवायत बोदर ने नवघण (इ.स. 1025-1044) को जूनागढ़ की गद्दी पर बैठाकर अपने रक्त से तिलक किया | रा’ नवघन ने भी जाहल के विवाह में एक भाई हर फर्ज अदा किया और बहन को कुछ भी मांगने को कहा | जमीन चाहिए तो जमीन, पूरा राज्य चाहिए तो पुरा राज्य और अगर बहन को सर चाहिए तो सिर दान भी दुंगा | मगर जाहल ने कहा : नही भाई  मुझे अभी कुछ नही चाहिए, कभी जरुरत पडी तो आप से मांग लुंगी |

गुजरात के प्रमुख यादव –

1.      श्रुति अहीर – प्रसिद्ध लोक गायक
2.      मदाम विक्रम भाई अर्जन भाई अहीर – पूर्व सांसद - जामनगर, कांग्रेस
3.      वासन भाई अहीर – पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक – अजनार विधानसभा, कच्छ जिला, बीजेपी

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                                  वासन भाई गोपाल भाई अहीर

4.      पूनम बेन हेमत भाई मदाम – पूर्व विधायक - खम्भलिया एवं वर्तमान सांसद, जामनगर, बीजेपी,
पूनम बेन मदाम गुजरात की प्रभुत्वशाली महिला सांसद मानी जाती है | सांसद बनने से पूर्व यह खम्भलिया विधानसभा से बीजेपी विधायक थी | इनके पिता स्व० हेमंत भाई  खम्भलिया विधानसभा से छः बार विधायक रहे थे | स्व० हेमंत भाई मदाम 1972-1990 तक चार बार निर्दलीय विधायक रहे | वह तीन बार जामनगर के मेयर भी बने थे| जामनगर के पूर्व कांग्रेसी सांसद मदाम विक्रम भाई अर्जन भाई अहीर रिश्ते में इनके चाचा हैं|

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                                       मदाम पूनम बेन हेमंत भाई
5.      पभुभा मानेक – विधायक – द्वारिका, बीजेपी
6.      रन छोड़ भाई देसाई – विधायक – पाटन, बीजेपी
7.      जशुभाई बराड – विधायक – तलाला, कांग्रेस
8.      जवाहर चावड़ा – विधायक – मंवादर, कांग्रेस 
9.  जेठा भाई घेला भाई अहीर – विधायक - शेहरा, बीजेपी
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                                                              जेठा भाई घेला भाई अहीर

10.  कनुभाई कलसरिया – पूर्व विधायक (महुवा)
11.  मुलुभाई बेरा – पूर्व विधायक

यदुवंशी राजपूत विधायक
1.      भूपेंद्र सिंह मनुभा चुडासमा – विधायक – धोलका व शिक्षा मंत्री(काबिना), बीजेपी
2.      जयराज सिंह तेमुभा जडेजा – विधायक – गोंडल, बीजेपी
3.      कांधल सरमन भाई जडेजा – विधायक – कुतियाना, कांग्रेस
4.      प्रदीप सिंह भागवत सिंह जडेजा – विधायक- वत्व व राज्य मंत्री –कानून एवं न्याय, बीजेपी
5.      धर्मेन्द्र सिंह जडेजा – विधायक- जामनगर (उ०) – कांग्रेस
प्रशासन
1.      आर. एम्. जादव – आई. ए. एस. अधिकारी
2.      अशोक कुमार यादव – आई पी एस अधिकारी
3.      बिपिन शंकर राव अहीर – आई पी एस अधिकारी
4.      आर एस यादव – आई पी एस अधिकारी

                


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62 टिप्‍पणियां:

  1. गुजरात मैं भरवाड़ ग्वाल वंशी यादव है। समझें सालों तुम लोग। एक बार गुजरात में आ जाना। और भरवाड का इतिहास साक्षी है अभी भी। ओक

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    1. Jai Yadav jai madhav
      I Virendra Yadav from Agra Uttar Pradesh

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    2. रबारी की उत्पत्ति शिव जी से हुई

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    3. आभिर भरवाड Samaj Yaduvanshi hai Salo Chutiya Banavo Dusre stet Ke Logo Ko

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    4. Hum south gujarat se hai.
      Dhodiya patels hai .
      Hum bhi chandrvanshi ( jadav rajputs ) se sabandhit hai .
      Dwaik8ke samapan ke bad shree krhsina ji ne dhana aur rupa nam ke do yaduvanshiyo ko south gujarat me chale jane ko kaha tha . Hum yaha cattle ke sath the iskoye dhodiya nam mila hai .

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    5. जेठा भाई भी भरवाड़ अहीर है सिर्फ अहीर नहीं . भरवाड़ अहीर में पहले विवाह सम्बन्ध भी था और एक दूसरे में विवाह भी करते थे

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  2. उत्तर
    1. अजी मेरा घंटा । रेबारी की उत्पति शिव से है । ऊंट चराने के लिए बनाया गया था तुमको....

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    2. रबारी की उत्पत्ति शिवजी से हुई है रबारी यदुवंशी नहीं है

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    3. रेबारी उंट पालक है उसकी उत्पति भगवान शिव से हूई है और रेबारी मूल अफ़ग़ानिस्तान के है और वो विदेशी है

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  3. Ye jadeja bhati jadhav cbusadava inka koi itihas ni hai ye apne apko krisn k vans mnte hai khi mahbabrt purano m ni likha ye apne ap se hi man n lge ydi yaduvansi hai rajputo m ku mile yadav likhte n surname sb jhut hai apne ap bnaya krisn k vnsaj sirf yadav ahir hi hai..

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    1. हा भाई उनके पास प्रूफ नहीं है पर गोपालक भरवाड़ के पास प्रूफ है और गुजरात में सब को पता है कि भरवाड़ श्री कृष्ण के साथ ही गुजरात आए थे

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  4. Ye sub ko yadav hi bana dega lagta hai Bharat me dusra koi Jati bacchega hi nahi

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  5. Dhangar gadariya yadav agar ek jati hai to saadi sambandh kyu nhi hote apas mai

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  6. જાડેજા એ કદી કૃષ્ણ ભગવાન કો યાદ નહી કીયા અને યાદવ બનવું છે

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  7. Tune bharwad ko bhed Charane Vala djkhaya salo Ham Bharwad hai
    Tumhara bap bharwad Yadav... hai..Kabhi aana Gujarat me ......Jay Thakar....

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    उत्तर
    1. Tum bharwad gadariya hi hi beta yadav na bano.
      Jaake apna caste certificate dekho

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    2. Tum bharwad gadariya hi hi beta yadav na bano.
      Jaake apna caste certificate dekho

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    3. Sahi bat he bhai sala one dekhadi daye apde gayo charvani sathe su su kari sakye...

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    4. अभिषेक सिंह गडरिया में रेबारी को भी डाला गया है जो निकल गए है और अब भरवाड़ भी निकाल जाएंगे

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    5. Bhai rabari samaj ka gadriya samaj se koy lena Dena nahi he to rabari samaj bich me na laye
      Rabari ke gotra pehnawa kan pan
      Riti rivaj sab alag he Gadriya samaj se
      Rabari samaj gujarat,rajasthan,
      Haryana,panjab,shind paya jata
      He
      Rajasthan me or haryana me rabari samaj or gadriya dono
      He dono ko alag name se jana
      Jata he or dono samaj koy saband
      Nahi he
      Rajasthan me to dono samaj ak hi jile me or gav me paye jate he
      Yaha bi dono samaj alag hi he agar ak ho Te to dono samaj ko ak rajya me alag name na jana jata ak name se jana jata
      To bhai merbani kar ke rabari samaj ko gadriya samaj se or
      Dusre samaj se na jode
      Agr koy bi samaj ke bare koy
      Jankari na hoto comments na
      Kare or ha ye comments delete
      Kare bhai

      हटाएं
  8. Jo gaderiya charwaha ye bol raha he jadaun bhati jadeja chudasama wadiyar yadav rajvansh ke yaduvanshi rajput nahi he wo ek bar apne itihas pata kar le ...kalug ke kis rajao ke vansaj ho khud pata kar lo apne bare me kyuki maysur jesalmed gujart karauli barodha saouth inida pe inka hi raj raha he aur wadiyar chudasama jadaun bhati jadeja ye yadav vansh ke rajao ke nam he aur unke vansaj unke nam lagate he..jaise yadu ke vansaj yadav kehlaye he waise hi keihsn vrishni vansh ke yadav the ..aur kalug me jadeja jadaun bhati chudsma waisyar kalchuri vansh ke yadav o ka raj tha..inke alwa yadavo me koi bada raja nahi tha chahe kutch ki bat karo karauli ki bat karo chahe gujrat ki chahe jaisal med maisur ki sab jagah regusterd he ye nam yaduvshi sasako me...tumlog apne apne itihas pata karo kalug me kaun se jamindar kaun se raja kaun se vansh ke jagirdar ho kaha kaha kile he tumligo ke tumlogo ka koi itihas nahi he..
    Aur ek bat yadavo me jo raja hota tha yodha hota tha jamindari jagirdar hota tha isko upadhi title milti thi aur wo nam me rao thakur singh chudri lagate the...kisi bhi yadav rajvansh ke rajao ke nam me yadav nahi likha gaya he ...asali yadav rajvansh me yaduvshi yadav sirf kaha jata he par likhne ko thakur rao chudri singh jo ki sabse upar grad barand ke yadavo ko hi milti thi...bad baki kisi bhi yaduvshi gawla charwahe gaderiya aur kehti kafane wale dudh bechane wle yaduvshi me koi upadhi tile nahi juri kyuki wo niche grade ke yaduvshi he..jakar apne itihas pata karo jadaun bhati jadeja chudsma saini banfar kalchuri wadiyar ye sb ke itihas kile mahal regiterd bane hue he pure bharat se lekar purane alhand bharat ke hindu rajstra tak...acha hoga khud ko sabit karo agar khud ko sabit nahi kar skte to apne bap yani yaduvshi thakuro rao chudri singh pe bat karane ki tum logo ki aukat nahi he..

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  9. भरवाड़ का शाब्दिक अर्थ भेड़ से नहीं है । भरू प्रदेश में बसने वाले यादवों के समूह को भरुवाड कहा गया जिसका बाद ने अपभ्रंश भरवाड़ हुआ । और वाड मतलब घेराव या अपना बनाया हुआ एरिया । भरू प्रदेश पर सिर्फ भरू यादवों का जोर था ।

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  10. गड़रिया यादव नही होता है वो अलग है कृपया इस लेख में सुधार करे और जडेजा भरवाड़ भी यादव नही है न ही श्री कृष्ण से सम्बंधित है

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    1. Bhai tuje etihas ka pata nahi hai pehle dekhle asa bakvas mat kar

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    2. भोसडीवाले चल नंबर दे प्रूफ चाहिए तो
      मादरचोद गवालिनाथ क्या ऐसे ही बन गया है साले क्यों बिना बात के भरवाड़ समाज को बदनाम करते हो

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  11. गड़रिया यादव नही होता है वो अलग है कृपया इस लेख में सुधार करे और जडेजा भरवाड़ भी यादव नही है न ही श्री कृष्ण से सम्बंधित है

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  12. गड़रिया यादव नही होता है वो अलग है कृपया इस लेख में सुधार करे और जडेजा भरवाड़ भी यादव नही है न ही श्री कृष्ण से सम्बंधित है

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    1. एकबार गुजरात आजा देख गोपालक कौन है और कोन गाय पालता है, किसी से पूछ ना भरवाड़ के भांजे कौन थे तो बताएगा कृष्णा भरवाड़ के भांजे थे

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  13. Ham bharvad pehle GOP yadav kahe jate the lekin dvarka ane par ham bharuch me rahne lage aur bharvad kahlane lage aaj bhi hamare pass krishna hai ham unhai thakar kahte hai ham pehle se gvalvanshi yadav hai hame apmanit mat karo

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  14. भरवाड़ ,जडेजा,गायकवाड़,चुडासमा, अहीर,गोप,गवली,यादव ये सभी भगवान कृष्ण के वंशज हैं।अपनी अज्ञानता से यदुवंशियों की शक्ति कमजोर मत करो।यदुवंशी होने के नाते सभी एक हैं।अपने अहम व बड़प्पन के भाव को छोड़कर ,ऊँच-नीच का विचार त्यागकर भगवान कृष्ण की खातिर,अपने कौम की खातिर एक हो जाओ।यदुवंशी भाइयों मथुरा में भक्तगण कान्हा जी को ठाकुर जी कहकर पुकारते हैं तो जो-जो यदुवंशी साम्राज्य कायम किए,शासन किए उनका टाइटिल भी बदला लेकिन उन लोगों ने हमेशा अपने आपको यदुवंशी ही माना तथा भगवान कृष्ण को अपना कुलदेवता आराध्य माना।यही सबसे बड़ा सबूत है उनके यदुवंशी होने का।इसलिए सभी यदुवंशी एक-दूसरे का सम्मान करो ,एक-दूसरे से प्रेम करो,एकता के सूत्र में बंध जाओ ,इसमें ही हमारा यश बढ़ेगा।

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    1. अबे सालो भरवाड़ का कृष्ण से नाता है, और हमारे पास सब प्रूफ है जिसको चाहिए वो आजाए...
      आज भी 5000 साल पुराना ग्वालीनाथ महादेव मंदिर गुजरात में है जहां भरवाड़ कृष्ण के साथ आए थे. आज भी वह मंदिर इतिहास की साक्षी पुरता है...
      और भरवाड़ श्री कृष्ण के साथ गुजरात आए थे सब प्रूफ हमारे पास है ये तो भरवाड़ को नीचा दिखाने की साज़िश है और गुजरात मा आके पूछ लेना गोपालाक जाती कौन है

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    2. सही बात है, गुजरात के जो आहार कलाकार है वो भी कृष्ण और भरवाड़ का इतिहास बोलते है पर ये कुछ ही बहनचोद है जो भरवाड़ को बदनाम करते है

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    3. सही बात है भाई, गुजरात की खूंखार जाति गोपालक भरवाड़ है उसे भी गडरिया बनाने की कोशिश कर रहे है क्या मजा आता होगा यदुवंशी एकता तोड़ने में

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  15. Bharwad Yaduvanshi nahi hote h ye gadariya h.aaj inki stithi sahi ho gayi h to saale yadav ban rahe.
    Jaake apna caste certificate dekho.
    Aaj bhi gir jungle k bharwad aur rebari SC me aate h.
    Sudhar jao nahi to yaha k to ho hi nahi aur waha se bhi jaoge.

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    2. अबे मादरा चोद भरवाड़ गडरिया है तो कुछ तो संयोग इतिहास होगा ना भरवाड़ और गडरिया का तो बताना????
      कोई गोत्र वंश साख कुछ भी गडरिया से मिलता जुलता नहीं है. भोसडिवाला तू गडरिया और भरवाड़ का जुड़ता इतिहास पेश कर वरना हमारे पास श्री कृष्ण और भरवाड़ का इतिहास है हम पेश करेंगे. और जिसको प्रूफ चाहिए वो आ जाए बनासकांठा गुजरात....

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    3. अबे मादरचोद गुजरात में यदुवंशी सम्मेलन हुई थी उसमें भरवाड़ भी थे.. चूतिये किसी से पूछ लेना. हम गडरिया थे तो क्या यदुवंशी सम्मेलन बना शक्ते थे????

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  16. Madarchod sabko ab yadav/aahir hi hona he
    Khud ke baap ka nam laganeme saram
    Aati hongi

    Jo dusre ke bap ko apna bap bna rahe he

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    1. कुछ मादर चोद, भरवाड़ को नीचा दिखाने के लिए यह साज़िश कर रहे है और सबको पता है कि भरवाड़ कृष्ण का नाता है और कृष्ण भरवाड़ के भांजे थे

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  17. यह सिर्फ एक साज़िश है भरवाड़ को बदनाम करने की, भरवाड़ गोपालक है और गुजरात में सब जानते है कि भरवाड़ और श्री कृष्ण का क्या संबंध है.....
    यह सिर्फ भरवाड़ समाज को बदनाम करने की साज़िश है इसे कोई सच न माने और सब प्रूफ हमारे पास है कभी भी आजाओ मादर चोद भड़वो����

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  18. भरवाड़ का शाब्दिक अर्थ भेड़ से नहीं है । भरू प्रदेश में बसने वाले यादवों के समूह को भरुवाड कहा गया जिसका बाद ने अपभ्रंश भरवाड़ हुआ । और वाड मतलब घेराव या अपना बनाया हुआ एरिया । भरू प्रदेश पर सिर्फ भरू यादवों का जोर था ।

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  19. भरवाड गोप यादव है गुजरात में सबसे ज्यादा गौपालन करते है और भरु प्रदेश मे रहने से भरु का अपभ्रंस शब्द भरवाड है और गुजरात मे सब जाती के लोग को पता है कृष्ण भगवान भरवाड के भानजे थे और जब श्रीकृष्ण और यादव मथुरा से गुजरात आये तो थरा मे रुकाव किया था वहा इतिहास मौजुद हे भरवाड यदुवंशी होने का और वहा पे श्रीकृष्ण ने अपने हाथ से ग्वालीनाथ महादेव की स्थापना की ग्वालीनाथ का मतलब हे गवालो का नाथ ये मंदिर सबसे बडा पुरावा हे भरवाड यदुवंशी होने का

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  20. यदुकूले चंद्रवंशी अभीर महाराज कार्तवीर्यात्मजार्जुना तस्यांवाये उमुत्पन्नःवीरसेनादयो नृपाः अर्थात -(पद्मपुराण कालिका महात्मय) में लिखा है -यदुकूल के चंद्रवंशी अहीर महाराज कार्तवीर्य के पुत्र अर्जुन अथवा सहस्त्रार्जुन उस वंश में वीरसेन आदी राजा पैदा हुए हैं

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