हरियाणा
हरियाणा उत्तर भारत का एक समृद्ध और उन्नत प्रान्त है। हरियाणा शब्द की उत्त्पत्ति कब और कैसे हुई, इस सम्बन्ध में अनेक मत प्रचलित है। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ बुध प्रकाश के अनुसार इस क्षेत्र का पुराना नाम 'अहिरयाणा' था | जो कालांतर में 'अहिरयाणा' के अपभ्रंश से 'हरियाणा' शब्द की उत्त्पत्ति हुई। एक अन्य मत, जो लोगों में अधिक मान्य है, के अनुसार हरियाणा शब्द की उत्त्पत्ति 'हरि' के नाम से हुई। भगवान श्रीकृष्ण (हरि) वृज से द्वारिका जाने के लिए अपने यान में बैठकर इस क्षेत्र से गुजरते थे। इस प्रकार ' हरि +यान' के संयोजन से हरियाणा शब्द की उत्त्पत्ति हुई - ऐसा माना जाता है। हरियाणा के अंतर्गत गुडगाँव, रेवाड़ी, महेन्दरगढ़, झज्जर और भिवानी जिले का कुछ भाग तथा वर्तमान में राजस्थान की बहरोड़, मुडावर, बानसूर, कोटकासिम, अलवर तथा भरतपुर तहसीलों वाला क्षेत्र अहीर बाहुल्य होने के कारण अहीरवाल कहलाने लगा। स्वाधीनता की ढाल कहा जाने वाला अहीरवाल वीरता की अद्भुत मिसाल है। यहाँ का व्यक्ति वीर, साहसी, पराक्रमी तथा निडर रहा है।
महाभारत काल में यहाँ रेवत नामक राजा का राज था। उसकी पुत्री का नाम रेवती था। वह प्यार से उसे 'रेवा' पुकारता था। उसी के नाम पर राजा ने इस स्थान का नाम रेवा-वाड़ी रखा था। रेवती का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से हुआ, तब राजा ने दान स्वरुप इसे बलराम जी को भेट कर दिया था। बाद में इसका नाम रेवा-वाड़ी से बदल कर रेवाड़ी हो गया।
मुग़ल काल में यह वीर भूमि रेवाड़ी रियासत के नाम से विख्यात थी, जहाँ लम्बे समय तक यदुवंशियों का गौरवमयी शासन रहा। जिसने देश, समाज और जनहित में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। इसी गौरवशाली राजवंश में महान योद्धा राव तुलाराम का जन्म हुआ। उनकी रहनुमाई में अहीरवाल के शूरवीरों ने प्रथम स्वाधीनता-संग्राम में जो खून की होली खेली थी, उसका उल्लेख भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिपिबद्ध है ।
प्राचीन काल में हरियाणा में अहीर जाति का शासन रहा है | इतिहासकारों के अनुसार अहीर जाति की उत्पति प्राचीन अभीर जाति से हुई है | हरियाणा राज्य के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी एवं गुडगाँव जिले तथा राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले के क्षेत्र सम्मिलित रूप से अहिरवाल के नाम से जाना जाता है | हरियाणा में यादवों की आबादी लगभग 10% है | हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, भिवानी तथा गुडगाँव जिला यादव बहुल माना जाता है |
हरियाणा के अहीर बड़े शूरवीर एवं पराक्रमी हुआ करते थे, जिनकी वीरता की अमरगाथा इतिहास के पन्नों में लिपिबद्ध है |
मुग़ल काल में सम्पूर्ण हरियाणा पर अहीरों का शासन था तथा प्रारम्भ में वे मुगलों के अधीन थे तथा बाद में अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिए थे | शेरशाह सूरी के विरुद्ध लड़ाई में अहीर खाप ने अपने प्रमुख राव रूरा सिंह के नेतृत्व में मुग़ल बादशाह हुमायूँ की मदद की थी | जब हुमायूँ ने दूसरी बार दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा किया, तब उन्होंने राव रूरा सिंह को एक परगना के प्रमुख बना दिया, जिसका मुख्यालय रेवाड़ी था | मुग़ल शासन के दौरान अहीर राज्य मुगलों के मित्र राज्य के रूप में था | राव तेज सिंह का मुगलों के साथ मित्रवत सम्बन्ध था | 1803 ई० में लार्ड लेक ने मुगलों की शक्ति एवं स्थिति में कटौती कर दिया तथा अहीर राज्य पर भी कब्ज़ा कर लिया | उस समय राव पूरण सिंह रेवाड़ी के राजा थे | राव तुला राम का जन्म 1825 ई० में हुआ था | राव पूरण सिंह के निधन पर 13 वर्ष की उम्र में ही राव तुला राम रेवाड़ी के राजा बने | राव तिला राम महान योद्धा, महत्वाकांक्षी तथा स्वतंत्रताप्रिय थे |
यह जानकर अन्तरात्मा रो उठती है कि आज भारतीय जनता उस वीर शिरोमणि राव तुलाराम के नाम से परिचित तक नहीं । मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि यदि झांसी की लक्ष्मीबाई ने स्वातन्त्र्य-संग्राम में सर्वस्व की बलि दे दी, यदि तांत्या टोपे एवं ठाकुर कुंवरसिंह अपने को स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर उत्सर्ग कर गये - यदि यह सब सत्य है तो यह भी सुनिर्धारित सत्य है कि सन् 1857 के स्वातन्त्र्य महारथियों में राव तुलाराम का बलिदान भी सर्वोपरि है । किन्तु हमारी दलित भावनाओं के कारण राजा तुलाराम का बलिदान इतिहास के पृष्ठों से ओझल रहा । आज भी अहीरवाल में जोगी एवं भाटों के सितारे पर राजा तुलाराम की अमर गाथा सुनी जा सकती है । किं बहुना, एक दिन उस वीर सेनापति राव तुलाराम के स्वतन्त्रता शंख फूंकने पर अहीरवाल की अन्धकारावृत झोंपड़ियों में पड़े बुभुक्षित नरकंकालों से लेकर रामपुरा (रेवाड़ी) के गगनचुम्बी राजप्रसादों की उत्तुंग अट्टालिकाओं में विश्राम करने वाले राजवंशियों तक ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध किये जा रहे स्वातन्त्र्य आन्दोलन में अपनी तलवार के भीषण वार दिखाकर क्रियात्मक भाग लिया था । आज भी रामपुरा एवं गोकुलगढ़ के गगन-चुम्बी पुरातन खंडहरावशेष तथा नसीबपुर के मैदान की रक्तरंजित वीरभूमि इस बात की साक्षी दे रहे हैं कि वे अपने कर्त्तव्य पालन में किसी से पीछे नहीं रहे ।
इस प्रान्त को स्वातन्त्र्य-युद्ध में भाग लेने का मजा तुरन्त ब्रिटिश सरकार ने चखा दिया । राव तुलाराम के राज्य की कोट कासिम की तहसील जयपुर को, तिजारा व बहरोड़ तहसील अलवर को, नारनौल व महेन्द्रगढ़ पटियाला को, दादरी जीन्द को, बावल तहसील नाभा को, कोसली के आस-पास का इलाका जिला रोहतक में और नाहड़ तहसील के चौबीस गांव नवाब दुजाना को पुरस्कार रूप में प्रदान कर दिया । यह था अहीरवाल का स्वातन्त्र्य संग्राम में भाग लेने का परिणाम, जो हमारे संगठन को अस्त-व्यस्त करने का कारण बना । और यह एक मानी हुई सच्चाई है कि आज अहीर जाति का न तो पंजाब में कोई राजनैतिक महत्व है और न राजस्थान में । सन् 1857 से पूर्व इस जाति का यह महान् संगठन रूप दुर्ग खड़ा था, तब था भारत की राजनीति में इस प्रान्त का अपना महत्व ।
अन्त में भारतवर्ष के स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास लेखकों से यह आशा करता हूं कि वे भारत के नवीन इतिहास में इस वीर प्रान्त की आहुति को उपयुक्त स्थान देना न भूलेंगे ।
हरियाणा में अनेक यादव सपूतों ने जन्म लिया जिनमे कुछ प्रमुख विभूतियों के नाम इस प्रकार है –
- राव तुला राम – रेवाड़ी के राजा और 1857 के स्वाधीनता युद्ध में भाग लेने वाले प्रमुख
सेनानी
- राव मोहर सिंह – ब्रिटिश पंजाब के विधायक और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी
- स्वामी रामदेव –
स्वामी रामदेव एक भारतीय योग-गुरु हैं, जिन्हें अधिकांश लोग बाबा रामदेव के नाम से ही जानते हैं। उन्होंने आम आदमी को योगासन व प्राणायाम की सरल विधियाँ बताकर योग के क्षेत्र में एक अद्भुत क्रांति की है। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें प्राय: हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं। रामदेव अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं।[2] भारत से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये अष्टांग योग के माध्यम से जो देशव्यापी जन-जागरण अभियान इस सन्यासी वेशधारी क्रान्तिकारी योद्धा ने प्रारम्भ किया, उसका सर्वत्र स्वागत हुआ।
- संतोष यादव – पर्वतारोही –
संतोष यादव भारत की एक पर्वतारोही हैं। वह माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली विश्व की प्रथम महिला हैं। इसके अलावा वे कांगसुंग (Kangshung) की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने वाली विश्व की पहली महिला भी हैं। उन्होने पहले मई 1992 में और तत्पश्चात मई सन् 1993 में एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में सफलता प्राप्त की।
संतोष यादव का जन्म सन 1969 में हरियाणा के रेवाड़ी जिले में हुआ था। उन्होने महारानी कॉलेज जयपुर से शिक्षा प्राप्त की है। सम्प्रति वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में एक पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें सन 2000 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है।
- राव वीरेन्द्र सिंह (20 फरवरी 1921 – 30 सितम्बर 2009) – राजनेता
राव वीरेन्द्र सिंह हरियाणा के लोकप्रिय राजनेता एवं रेवारी के राजा राव तुला राम के वंशज थे | पंजाब के जनप्रिय मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के मंत्रिमंडल में उन्होंने अनेक मंत्रालयों का कार्यभार संभाला | 1966 में पंजाब से अलग कर हरियाणा राज्य के गठन होने पर वे पटौदी विधानसभा से विधायक बने तथा उन्हें हरियाणा विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | 23 मार्च 1967 को वे हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री ( 23 मार्च 1967 – 02 नवम्बर 1967 )बने | 1967 में उन्होंने विशाल हरियाणा पार्टी की स्थापना की | 1971 में वे इसी पार्टी से महेंद्रगढ़ के सांसद बने| 1978 में उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया | वे इंदिरा गाँधी एवं राजीव गाँधी मंत्रिमंडल में मंत्री बने | बाद में उन्होंने कांग्रेस एवं लोकसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया | 1989 में वे जनता दल से महेंद्रगढ़ के सांसद बने तथा चंद्रशेखर सरकार में कैबिनेट मंत्री बने | 30 सितम्बर 2009 को उनका निधन हो गया | उनके पुत्र श्री राव इन्द्रजीत सिंह वर्तमान में गुडगाँव के सांसद हैं |
- राव बलबीर सिंह – राजनेता – वे राव तुला राम के पौत्र थे | उनका जन्म 1884 ई० में हुआ था | उन्होंने 1910 में अखिल भारतीय अहीर यादव महासभा के गठन में अग्रणी भूमिका निभाई थी |
- सतगुरु महाराज राम सिंह अरमान – राधा स्वामी धार्मिक आन्दोलन के संत, ‘अरमान सागर’ के लेखक
- प्राण सुख यादव – स्वतंत्रता सेनानी एवं राव तुला राम के सहयोगी
- रघु यादव – पूर्व सांसद महेंद्रगढ़ एवं सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन के प्रणेता
- कर्नल राम सिंह – महेंद्रगढ़ के पूर्व सांसद, बीजेपी नेता
- राव इंदरजीत सिंह – केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार)- सांख्यिकी, योजना क्रियान्वयन एवं रक्षा एवं गुडगाँव से भाजपा सांसद | वह चार बार विधायक चुने गए, सर्वप्रथम 1977 में वह विधायक बने, 1982-87 में राज्य सरकार में खाद्य तथा आपूर्ति मंत्री रहे | 1998 तथा 2004 में उन्होंने महेंद्रगढ़ से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता | केंद्र सरकार में वह 1991-1996 में वन, पर्यावरण, चिकित्सा विभाग मे मंत्री रहे | 2004 -2006 में वह केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे| 2009 में वह गुडगाँव से कांग्रेस सांसद बने | 2014 में उन्होंने ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया तथा भाजपा में सम्मिलित हो गए तथा भाजपा के टिकट पर गुडगाँव से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल किये |
- कैप्टेन अजय सिंह यादव – रेवाड़ी के पूर्व कांग्रेसी विधायक | हुड्डा सरकार में यह हरियाणा के राजस्व मंत्री थे | 2014 में यह विधानसभा चुनाव में पराजित हो गए |
- राव नरेन्द्र सिंह – इन्होंने 2009 में हजका के टिकट पर नरनौल से विधानसभा चुनाव जीता, परन्तु दल-बदलकर यह कांग्रेस में शामिल हो गए तथा हरियाणा के हुड्डा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने | 2014 में नारनौल से विधानसभा चुनाव हार गए |
- राव यादवेन्द्र सिंह – राव तुला राम के वंशज, राव इन्द्रजीत सिंह के भाई एवं कोसली से पूर्व कांग्रेसी विधायक |
- अनीता यादव – अटेली विधानसभा से पूर्व कांग्रेस विधायिका
- राव बहादुर सिंह – नंगल-चौधरी से पूर्व विधायक
- राव धरमपाल सिंह – पूर्व कांग्रेसी विधायक, बादशाहपुर
- विमल यादव – गुडगाँव के मेयर
- विजय यादव – क्रिकेटर (विकेट कीपर)
- राव नरबीर सिंह – राव मोहर सिंह के वंशज, सोहना के पूर्व विधायक, बीजेपी नेता एवं बादशाहपुर से विधायक, कैबिनेट मंत्री - लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) विभाग
22. न्यायाधीश निर्मल यादव- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं गुडगाँव से
सांसद राव इन्द्रजीत सिंह की बहन
23. बिक्रम सिंह ठेकेदार - कोसली से बीजेपी विधायक एवं खट्टर सरकार में सहकारिता राज्य मंत्री
2014 विधानसभा चुनाव में हरियाणा के निर्वाचित यादव विधायक
1. अटेली - श्री मति संतोष यादव (बीजेपी)
2. नारनौल - ओमप्रकाश यादव (बीजेपी)
3. नंगल चौधरी - अभय सिंह यादव (बीजेपी)
4. कोसली - बिक्रम सिंह (बीजेपी)
5. रेवारी - रंधीर सिंह कप्रिवास (बीजेपी)
6. बादशाहपुर - राव नरबीर सिंह (बीजेपी)
2014 में दुसरे स्थान पर रहे प्रमुख यादव प्रत्याशी
1. राव दान सिंह (कांग्रेस) - महेंद्रगढ़ विधानसभा
2. जगदीश यादव (इन्लो) - कोसली
3. सतीश यादव (इनलो) - रेवारी
4. किशोर यादव (इनलो) - सोहना
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी
- नितिन कुमार यादव
- अभय सिंह यादव
- सज्जन सिंह यादव
- जीतेन्द्र यादव
- अशोक कुमार यादव
- संदीप यादव
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी
- योगेश यादव
thanks
जवाब देंहटाएंsabhi log mehnat karo age bado
जवाब देंहटाएंJay yadav jay madhav
जवाब देंहटाएंYadav Ekta jindabad Jai Yadav Jai Madhav
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा संजय यादव
जवाब देंहटाएंjai yadav mey garvse kehatahun mey yadav golla gwala ka betahun
जवाब देंहटाएंJay yadav
जवाब देंहटाएंYadavo ko an hona hoga and apana itihas phir se likhana hoga
जवाब देंहटाएंYadav yadav yadav
जवाब देंहटाएंJai yadav ki
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